एक ही मुश्दा सुभो लाती है - जॉन एलिया एक ही मुश्दा सुभो लाती है - जॉन एलिया Reviewed by Bhopali2much on September 30, 2017 Rating: 5

हम पंक्षी उन्मुक्त गगन के - शिवमंगल सिंह 'सुमन'

September 30, 2017
हम पंक्षी उन्मुक्त गगन के पिंजरबद्ध न गा पाऐंगे कनक तीलियों से टकराकर पुलकित पंख टूट जाऐंगे। हम बहता जल पीने बाले मर जाऐंगे भूखे प्यासे कहीं...
हम पंक्षी उन्मुक्त गगन के - शिवमंगल सिंह 'सुमन' हम पंक्षी उन्मुक्त गगन के - शिवमंगल सिंह 'सुमन' Reviewed by Bhopali2much on September 30, 2017 Rating: 5
रीत भले है अलग हमारी पर पूजन तो पूजन है - देवल आशीष रीत भले है अलग हमारी पर पूजन तो पूजन है - देवल आशीष Reviewed by Bhopali2much on September 30, 2017 Rating: 5

कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए - दुष्यंत कुमार

September 30, 2017
कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए कहीं पे शाम सिरहाने लगा के बैठ गए जले जो रेत में तलवे तो हम ने ये देखा बहुत से लोग वहीं छट-पटा के बैठ गए ...
कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए - दुष्यंत कुमार कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए - दुष्यंत कुमार Reviewed by Bhopali2much on September 30, 2017 Rating: 5

अम्मा - अलोक श्रीवास्तव

September 30, 2017
चिंतन दर्शन जीवन सर्जन  रूह नज़र पर छाई अम्मा सारे घर का शोर शराबा सूनापन तनहाई अम्मा उसने खुद़ को खोकर मुझमें एक नया आकार लिया है, धरती अंब...
अम्मा - अलोक श्रीवास्तव अम्मा - अलोक श्रीवास्तव Reviewed by Bhopali2much on September 30, 2017 Rating: 5

ये तेरी बेरुखी की हमपे आदत खास टूटेगी - डॉ. कुमार विश्वास

September 29, 2017
ये तेरी बेरुखी की हमपे आदत खास टूटेगी कोई दरिया न ये समझे की मेरी प्यास टूटेगी तेरे वादे का तू जाने मेरा वो ही इरादा है की जिस दिन सांस टूटे...
ये तेरी बेरुखी की हमपे आदत खास टूटेगी - डॉ. कुमार विश्वास ये तेरी बेरुखी की हमपे आदत खास टूटेगी  - डॉ. कुमार विश्वास Reviewed by Bhopali2much on September 29, 2017 Rating: 5

मिले हर जख्म को ,मुस्कान से सीना नहीं आया - डॉ. कुमार विश्‍वास

September 29, 2017
मिले हर जख्म को ,मुस्कान से सीना नहीं आया अमरता चाहते थे पर, जहर पीना नहीं आया तुम्हारी और मेरी दास्ताँ में फर्क इतना हैं मुझे मरना नहीं आया...
मिले हर जख्म को ,मुस्कान से सीना नहीं आया - डॉ. कुमार विश्‍वास मिले हर जख्म को ,मुस्कान से सीना नहीं आया - डॉ. कुमार विश्‍वास Reviewed by Bhopali2much on September 29, 2017 Rating: 5

ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं - डॉ. कुमार विश्वास

September 29, 2017
ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं जिन्हें कोई नहीं समझा उन्हें बस हम समझते हैं कशिश जिन्दा है अपनी चाहतो में जानेजां क्यूंकि हमें तुम क...
ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं - डॉ. कुमार विश्वास ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं - डॉ. कुमार विश्वास Reviewed by Bhopali2much on September 29, 2017 Rating: 5

अभी चलता हूँ रस्ते को मैं मंजिल मान लू कैसे - डॉ. कुमार विश्‍वास

September 29, 2017
अ भी चलता हूँ रस्ते को मैं मंजिल मान लू कैसे मसीहा दिल को अपनी जिद का कातिल मन लूँ कैसे तुम्हारी याद के आदिम अँधेरे मुझको घेरे हैं तुम्हारे ...
अभी चलता हूँ रस्ते को मैं मंजिल मान लू कैसे - डॉ. कुमार विश्‍वास अभी चलता हूँ रस्ते को मैं मंजिल मान लू कैसे - डॉ. कुमार विश्‍वास Reviewed by Bhopali2much on September 29, 2017 Rating: 5
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं - गुलज़ार रिश्ते बस रिश्ते होते हैं - गुलज़ार Reviewed by Bhopali2much on September 28, 2017 Rating: 5

कुरान हाथों में लेके नाबीना एक नमाज़ी - गुलज़ार

September 28, 2017
कुरान हाथों में लेके नाबीना एक नमाज़ी लबों पे रखता था दोनों आँखों से चूमता था झुकाके पेशानी यूँ अक़ीदत से छू रहा था जो आयतं पढ़ नहीं सका उन ...
कुरान हाथों में लेके नाबीना एक नमाज़ी - गुलज़ार कुरान हाथों में लेके नाबीना एक नमाज़ी - गुलज़ार Reviewed by Bhopali2much on September 28, 2017 Rating: 5

हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते - गुलज़ार

September 28, 2017
हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन ऐसी तस्वीर के टुकड़...
हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते - गुलज़ार हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते - गुलज़ार Reviewed by Bhopali2much on September 28, 2017 Rating: 5
उसके पहलू से लग के चलते हैं - जॉन एलिया उसके पहलू से लग के चलते हैं - जॉन एलिया Reviewed by Bhopali2much on September 28, 2017 Rating: 5
हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गई - जॉन एलिया हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गई - जॉन एलिया Reviewed by Bhopali2much on September 28, 2017 Rating: 5
लौ-ए-दिल जला दूँ क्या - जॉन एलिया लौ-ए-दिल जला दूँ क्या - जॉन एलिया Reviewed by Bhopali2much on September 28, 2017 Rating: 5
कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे - जॉन एलिया कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे - जॉन एलिया Reviewed by Bhopali2much on September 28, 2017 Rating: 5

उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या - जॉन एलिया

September 28, 2017
उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या ? दाग ही देंगे मुझको दान में क्या ? मेरी हर बात बेअसर ही रही नुक्स है कुछ मेरे बयान में क्या ? बोलते क्यो नही...
उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या - जॉन एलिया उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या - जॉन एलिया Reviewed by Bhopali2much on September 28, 2017 Rating: 5
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