दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती इतनी ख़ूबसूरत ये ज़िंदगी नहीं होती


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दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती
इतनी ख़ूबसूरत ये ज़िंदगी नहीं होती

दोस्त पे करम करना और हिसाब भी रखना
कारोबार होता है दोस्ती नहीं होती

ख़ुद चराग़ बन के जल वक़्त के अंधेरे में
भीक के उजालों से रौशनी नहीं होती

शायरी है सरमाया ख़ुश-नसीब लोगों का
बाँस की हर इक टहनी बाँसुरी नहीं होती

खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो
हार जीत कोई भी आख़िरी नहीं होती

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दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती इतनी ख़ूबसूरत ये ज़िंदगी नहीं होती दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती
इतनी ख़ूबसूरत ये ज़िंदगी नहीं होती Reviewed by Bhopali2much on January 31, 2017 Rating: 5
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