किसी के दिल की मायूसी जहाँ से हो के गुजरी हैं - डॉ. कुमार विश्वास - Bhopali2Much

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Sunday, 9 April 2017

किसी के दिल की मायूसी जहाँ से हो के गुजरी हैं - डॉ. कुमार विश्वास

किसी के दिल की मायूसी जहाँ से हो के गुजरी हैं
हमारी सारी चालाकी वही पे खो के गुजरी हैं
तुम्हारी और हमारी रात में बस फर्क इतना हैं
तुम्हारी सो के गुजरी हैं , हमारी रो के गुजरी है

Kisi ke di l ki khamoshi jahan se ho ke guzri hai
Hamari saari chalaki wahi se kho ke guzri hai
Tumhari aur humari raat me bas fark itna hai
Tumhari so ke guzri hai hamari ro ke guzri hai

अभी चलता हूँ रस्ते को मैं मंजिल मान लू कैसे
मसीहा दिल को अपनी जिद का कातिल मन लूँ कैसे
तुम्हारी याद के आदिम अँधेरे मुझको घेरे हैं
तुम्हारे बिन जो बीते दिन उन्हें दिन मान लू कैसे

Abhi chalta hun raste ko main manzil maan lun kaise
Maseha dil ko apni zid ka katilman lun kaise
Tumhari yaad ke aadim andhere mujh ko ghere hain
Tumhare bin jo beete din unhe din maan lun kaise

ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं
जिन्हें कोई नहीं समझा उन्हें बस हम समझते हैं
कशिश जिन्दा है अपनी चाहतो में जानेजां क्यूंकि
हमें तुम कम समझते हो, तुम्हें हम कम समझते हैं

Ghamo ko aabroo apni khushi ko gham samajhte hain
Jinhe koi nahi samjha unhe bas hum samajhte hain
Kashish zinda hai apni chahton me jaanejan kyuki
Hame tum kam samajhte ho tumhe hum kam samajhte hain

मिले हर जख्म को ,मुस्कान से सीना नहीं आया
अमरता चाहते थे पर, जहर पीना नहीं आया
तुम्हारी और मेरी दास्ताँ में फर्क इतना हैं
मुझे मरना नहीं आया तुम्हे जीना नहीं आया

Mile har zakh m ko muskaan se seena nahi aaya
Amarta chahte the par zehar peena nahi aaya
Tumhari aur meri dastan me fark itna hai
Mujhe marna nahi aaya tumhe jeena nahi aaya.


ये तेरी बेरुखी की हमपे आदत खास टूटेगी
कोई दरिया न ये समझे की मेरी प्यास टूटेगी
तेरे वादे का तू जाने मेरा वो ही इरादा है
की जिस दिन सांस टूटेगी उसी दिन आस टूटेगी

Ye teri berukhi ki humpe aadat khaas tutegi
Koi dariya na ye samjhe ki meri pyaas tutegi
Tere waade ka tu jaane mera itna irada hai
Ki jis din saans tutegi usi din aas tutegi.

डॉ. कुमार विश्वास