फिर आग का दरिया है, और डूब के जाना है | Bhopali2much - Bhopali2Much

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Tuesday, 21 February 2017

फिर आग का दरिया है, और डूब के जाना है | Bhopali2much



वो  बोले  

ये  इश्क  नहीं  आसां , बस इतना  तो  समझ  लीजे,
एक  आग  का  दरिया  है , और  डूब  के  जाना  है ..

Yeh ishq nahi aasan, bas itna samajh lijiye
Ek aag ka dariya hai, aur doob ke jaana hai.

मैंने  कहा 

मासूम  सी  मोहब्बत  का  बस  इतना  सा   फ़साना  है 
कागज  की  हवेली  है , बारिश  का  ज़माना  है 

Masoom mohabbat ka bas itna sa fasana hai,
Kaagaz ki haveli hai, baarish ka zamana hai..

क्या  शर्त-ए-मोहब्बत  है , क्या  शर्त-ए-ज़माना  है  
आवाज़  भी  जख्मी  है  और  गीत  भी  गाना  है 

Kya shart-e-mohabbat hai, kya shart-e-zamana hai,
Aawaz bhi zakhmi hai, aur geet bhi gaana hai...

उस  पार  उतरने  की  उम्मीद  बहुत  कम  है 
कश्ती  भी  पुरानी  है , तूफ़ान  भी  आना  है 

Us paar utarne ki umeed bahut kam hai,
Kashti bhi purani hai, toofan ko bhi aana hai.

समझे  या  न  समझे  वो  अंदाज़ -ए -मोहब्बत  को,
इक शख्श को आँखों  से , कुछ  शेर  सुनाना  है 

Samjhe ya na samjhe wo andaaz-e-mohabbat ko
Ik shaksh ko aankhon se, kuch sher sunaya hai..

भोली  सी  अदा कोई, फिर  इश्क  की  जिद  पर  है 
फिर  आग  का  दरिया  है  और  डूब  ही  जाना है..

Bholi si ada koi, fir Ishq ki zid par hai...
Fir aag ka dariya hai, aur doob ke jaana hai ...

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