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शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है - गुलज़ार
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं - गुलज़ार
कुरान हाथों में लेके नाबीना एक नमाज़ी - गुलज़ार
हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते - गुलज़ार