एक ही मुश्दा सुभो लाती है ज़हन में धूप फैल जाती है सोचता हूँ के तेरी याद आखिर अब किसे …
उसके पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं मै उसी तरह तो बहलता हूँ और सब जि…
हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गई शौक़ में कुछ नहीं गया शौक़ की ज़िंदगी गई एक ही हादस…
लौ-ए-दिल जला दूँ क्या कहकशाँ लुटा दू क्या है सवाल इतना ही इनका जो भी मुद्दा है मैं उसे…
कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे | जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भात…
उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या ? दाग ही देंगे मुझको दान में क्या ? मेरी हर बात बेअसर ह…
अब जुनूँ कब किसी के बस में है उसकी ख़ुशबू नफ़स-नफ़स में है हाल उस सैद का सुनाईए क्या ज…
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