क्या अजब रात थी, क्या गज़ब रात थी दंश सहते रहे, मुस्कुराते रहे देह की उर्मियाँ…
मांग की सिंदूर रेखा, तुमसे ये पूछेगी कल, यूँ मुझे सर पर सजाने का तुम्हे अधिकार क्य…
तब बा वैश्णवन की पाग में श्री नाथ जी का चित्र हतैा सो काठि के रसखान को दिखायो तब…
Social Plugin