हार गया तन मन पुकार कर तुम्हें, कितने एकाकी हैं प्यार कर तुम्हें...........हार गय…
न वो इक़रार करता है न वो इंकार करता है हमें फिर भी गुमाँ है वो हमीं से प्यार करता…
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