जूते की अभिलाषा | Bhopali2much



चाह नही मैं विश्व सुंदरी के
पग में पहना जाऊँ,

चाह नही दूल्हे के पग में रह
साली को ललचाऊँ।

चाह नहीं धनिकों के चरणो में,
हे हरि डाला जाऊँ,

ए.सी. में कालीन पे घूमूं
और भाग्य पर इठलाऊ।

बस निकाल कर मुझे पैर से
उस मुंह पर तुम देना फेंक,

जिस मुँह से भी निकल रहे हो देशद्रोह के शब्द अनेक !


जय हिंद, जय भारत.
जूते की अभिलाषा | Bhopali2much जूते की अभिलाषा | Bhopali2much Reviewed by Bhopali2much on March 10, 2017 Rating: 5
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