क्या अजब रात थी, क्या गज़ब रात थी दंश सहते रहे, मुस्कुराते रहे देह की उर्मियाँ…
मांग की सिंदूर रेखा, तुमसे ये पूछेगी कल, यूँ मुझे सर पर सजाने का तुम्हे अधिकार क्य…
शौक़ सारे छिन गये, दीवानगी जाती रही आयीं ज़िम्मेदारियाँ, तो आशिकी जाती रही मां…
शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है दफ़्न कर दो हमें कि साँस…
हम पंक्षी उन्मुक्त गगन के पिंजरबद्ध न गा पाऐंगे कनक तीलियों से टकराकर पुलकित पंख टूट ज…
रीत भले है अलग हमारी पर पूजन तो पूजन है भाव सुमन है गीत भजन है स्वर क्या है अभ…
चिंतन दर्शन जीवन सर्जन रूह नज़र पर छाई अम्मा सारे घर का शोर शराबा सूनापन तनहाई अम्मा …
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