हर एक चेहरे को ज़ख्मों का आईना न कहो ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो न जाने कौ…
तेरी नफरत ने ये क्या सिला दिया मुझे, ज़हर गम-ए-जुदाई का पिला दिया मुझे ! बहुत रोया …
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