तेरी नफरत ने ये क्या सिला दिया मुझे, ज़हर गम-ए-जुदाई का पिला दिया मुझे !

तेरी नफरत ने ये क्या सिला दिया मुझे,
ज़हर गम-ए-जुदाई का पिला दिया मुझे !

बहुत रोया बहुत तड़पा तुम्हें पाने को,
तुमने एक कतरा भी प्यार नहीं दिया मुझे !

मैं इतना टूटा के बिखर गया राहों में,
मगर तुमने बाँहों में नहीं आने दिया मुझे !

मुझे दोष ना देना ना कहना कल मुझे कुछ,
गर किसी और ने बाँहों में सुला लिया मुझे !

माना तू नहीं बेवफा पर तुम्हें प्यार भी नहीं है,
जिसे प्यार था उसने सीने से लगा लिया मुझे !

एक तुम हो के मेरे छूने से भी घिन आती है,
एक वो है उसने काजल की तरह सजा लिया मुझे !

फिर प्यार हो रहा है थोड़ा खुश कुछ उदास हूँ मैं,
दर्द ये है कि कितना जल्दी उसने भुला दिया मुझे !!
तेरी नफरत ने ये क्या सिला दिया मुझे, ज़हर गम-ए-जुदाई का पिला दिया मुझे ! तेरी नफरत ने ये क्या सिला दिया मुझे,
ज़हर गम-ए-जुदाई का पिला दिया मुझे ! Reviewed by Bhopali2much on July 12, 2017 Rating: 5
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