इक सदा पैग़ाम देती फिर रही दर-दर, चुप्पियों से भी बड़ा है चुप्पियों का डर. रो…
*मेहनत* हम चाहें तो अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर अपना भाग्य खुद लिख सकते है …
जो बसेरा है अपनी रातों का सब उसे आसमान कहते हैं छत पर बारिश ने रात काटी है गीले …
लाख भीगे ज़मीन का आँचल, लाख किरणों की आँख गीली हों चाहे रोये सुबह की तन्हाई या कि …
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