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Thursday, 23 February 2017

एक मैं हूँ यहाँ एक तू है - डॉ. कुमार विश्वास | Bhopali2much


एक मैं हूँ यहाँ एक तू है
सिर्फ साँसों की ही गुफ्तगू है

चाँद के साज़ पर रोशनी
गीत गाते हुए आ रही है
तेरी ज़ुल्फ़ों से छनकर वो देखो
चांदनी नूर बरसा रही है

वक़्त यूं ही ठहर जाए हमदम
दिल की इतनी सी एक आरज़ू है
एक मैं हूँ यहाँ एक तू है...

एक मैं हूँ यहाँ एक तू है
सिर्फ साँसों की ही गुफ्तगू है

दूर धरती के काँधे पे देखो
आसमा झूम कर झुक गया है
नरम बाँहों के घेरे के बाहर
शोर दुनिया का चुप रुक गया है

मेरे ख़्वाबों में जो तैरती थी
अप्सरा तू वही हू-ब-हू है
एक मैं हूँ यहाँ एक तू है

एक मैं हूँ यहाँ एक तू है
सिर्फ साँसों की ही गुफ्तगू है

~ डॉ. कुमार विश्वास
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मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा
सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए

~ ~ ~ ~

Ek main hoon yahan ek tu hai
Sirf saanson ki hi guftagu hai

Chaand ke saaz par roshni
Geet gaate hue aa rahi hai
Teri zulfon se chankar wo dekho
Chandani noor barsa rahi hai

Waqt yun hi thahar jaaye humdum
dil ko itni si ek aarzoo hai
Ek main hoon yahan ek tu hai

Ek main hoon yahan ek tu hai
Sirf saanson ki hi guftagu hai

Door dharti ke kaande pe dekho
Aasmaa jhoom kar jhuk gaya hai
narm bahaon ke ghere ke bahar
Shor duniya ka chup ruk gaya hai

Mere khwaabon me jo tairati thi
apsara tu wahi hu-ba-hu hai
Ek main hoon yahan ek tu hai

Ek main hoon yahan ek tu hai
Sirf saanson ki hi guftagu hai

~ Dr. Kumar Vishwas

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Main to gazal suna ke akela khada raha
Sab apne apne chahne walon me kho gaye