ज़मीं पे चल न सका, आसमान से भी गया - शहीद कबीर



ज़मीं पे चल न सका आसमान से भी गया
कटा के पर को परिंदा उड़ान से भी गया

किसी के हाथ से निकला हुआ वो तीर हूँ जो
हदफ़ को छू न सका और कमान से भी गया

भुला दिया तो भुलाने की इंतिहा कर दी
वो शख़्स अब मिरे वहम ओ गुमान से भी गया

तबाह कर गई पक्के मकान की ख़्वाहिश
मैं अपने गाँव के कच्चे मकान से भी गया

पराई आग में कूदा तो क्या मिला 'शाहिद'
उसे बचा न सका अपनी जान से भी गया

- शाहिद कबीर

Zami pe chal na saka aasman se bhi gaya,
kata ke par ko parinda udaan se bhi gaya.

Kisi ke haath se nikla hua wo teer hoon jo,
Hadaf ko chu na saka aur kamaan se bhi gaya.

Bhula diya to bhulane ki intehaan kar di,
Wo shaksh ab mere waham-o-gumaan se bhi gaya.

Tabaah kar gai pakke makaan ki khwahish,
Main apne gaaon ke kachhe makaan se bhi gaya.

Paraai aag me kooda to kya mila "shahid",
Use bacha na saka apni jaan se bhi gaya...

- Shahid Kabeer
ज़मीं पे चल न सका, आसमान से भी गया - शहीद कबीर ज़मीं पे चल न सका, आसमान से भी गया - शहीद कबीर Reviewed by Bhopali2much on April 27, 2017 Rating: 5
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