तेरी हरबात मोहब्ब्त में गंवारा करके दिल के बाजार में बैठे खसारा करके मुन्तजिर हूं कि स…
इश्क में जीतके आने के लिये काफी हूं में निहत्था ही जमाने के लिये काफी हू मेरी हकीकत को…
सियासत में जरूरी है रवादारी समझता है वो रोजा तो नहीं रखता पर इफतारी समझता है।…
नई हवाओं की सौहवत विगाड़ देती है कबूतरों को खुली छत बिगाड़ देती है जो जुर्म…
कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया अफवाह थी कि मेरी तब…
मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो आसमां लाये हो ले आये जमीं पर रख दो अब कहां ढूंढने…
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