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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया - तहज़ीब हाफ़ी
तेरी कैद से मै युही रिहा नही हो रहा -  तहज़ीब हाफ़ी
ये कश्‍मकश है जिदंगी की,   कि कैसे बसर करें,   ख्‍वाहिशें दफन करें,   या चादर बड़ी करें।
क़बीले वालों के दिल जोड़िए मिरे सरदार - कैफ़ भोपाली
दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है, चले आओ जहाँ तक रौशनी मालूम होती है - नुशुर वाहिदी