मेरे लिहाज़ को कमज़ोरियाँ समझते हैं - डॉ. कुमार विश्वास




जो बातचीत के असली हिमायती थे कभी,‬
‪वो बातचीत को मुहँजोरियाँ समझते हैं,‬
‪मैं जो चुप रहता हूँ तो मेरे कुछ कमजर्फ अज़ीज़,‬
‪मेरे लिहाज़ को कमज़ोरियाँ समझते हैं...!

- डॉ. कुमार विश्वास

Jo baatcheet ke asli himaayati the kabhi
Wo baatcheet ko muhzoriyan samajhte hain
main jo chup rehta hu to mere kuch kamzarf ajeez
mere lihaaz ko kamjoriyan samajhte hain.

- Dr. Kumar Vishwas
मेरे लिहाज़ को कमज़ोरियाँ समझते हैं - डॉ. कुमार विश्वास मेरे लिहाज़ को कमज़ोरियाँ समझते हैं - डॉ. कुमार विश्वास Reviewed by Bhopali2much on March 30, 2017 Rating: 5
Powered by Blogger.