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जीवन नहीं मरा करता है - गोपाल दास नीरज जीवन नहीं मरा करता है - गोपाल दास नीरज Reviewed by Bhopali2much on September 28, 2017 Rating: 5

गणेश जी की आरती (Ganesh Aarti in Hindi)

August 28, 2017
गणेश जी की आरती (Ganesh Aarti in Hindi) जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय... एक दंत दयावंत चार भुजा धारी...
गणेश जी की आरती (Ganesh Aarti in Hindi) गणेश जी की आरती (Ganesh Aarti in Hindi) Reviewed by Bhopali2much on August 28, 2017 Rating: 5
भरोसा खुदा पर है, तो - Bhopali2much भरोसा खुदा पर है, तो  - Bhopali2much Reviewed by Bhopali2much on June 24, 2017 Rating: 5

जितना कम सामान रहेगा, उतना सफ़र आसान रहेगा - गोपालदास 'नीरज'

May 31, 2017
जितना कम सामान रहेगा उतना सफ़र आसान रहेगा जितनी भारी गठरी होगी उतना तू हैरान रहेगा उस से मिलना ना-मुम्किन है जब तक ख़ुद का ध्यान रह...
जितना कम सामान रहेगा, उतना सफ़र आसान रहेगा - गोपालदास 'नीरज' जितना कम सामान रहेगा, उतना सफ़र आसान रहेगा - गोपालदास 'नीरज' Reviewed by Bhopali2much on May 31, 2017 Rating: 5

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया - मजरूह सुल्तानपुरी

May 24, 2017
जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम-ए-जाँ बनता गया  सोज़-ए-जानाँ दिल में सोज़-ए-दीगराँ बनता गया  रफ़्ता रफ़्ता मुंक़लिब होती गई रस्म-ए...
मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया - मजरूह सुल्तानपुरी मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया - मजरूह सुल्तानपुरी Reviewed by Yogendra Nagre on May 24, 2017 Rating: 5

ज़िंदगी मौत के पहलू में भली लगती है, घास इस क़ब्र पे कुछ और हरी लगती है - सलीम अहमद

May 19, 2017
ज़िंदगी मौत के पहलू में भली लगती है  घास इस क़ब्र पे कुछ और हरी लगती है  रोज़ काग़ज़ पे बनाता हूँ मैं क़दमों के नुक़ूश  ...
ज़िंदगी मौत के पहलू में भली लगती है, घास इस क़ब्र पे कुछ और हरी लगती है - सलीम अहमद ज़िंदगी मौत के पहलू में भली लगती है, घास इस क़ब्र पे कुछ और हरी लगती है - सलीम अहमद Reviewed by Bhopali2much on May 19, 2017 Rating: 5

माँ - ममता खत्री

May 13, 2017
माँ  घुटनों से रेंगते रेंगते कब पैरों पर खड़ा हुआ, तेरी ममता की छाओं में जाने कब बड़ा हुआ! काला टीका दूध मलाई आज भी सब कुछ...
माँ - ममता खत्री माँ - ममता खत्री Reviewed by Yogendra Nagre on May 13, 2017 Rating: 5
अँधेरे वक़्त में भी गीत गए जायेंगे - डॉ. कुमार विश्वास अँधेरे वक़्त में भी गीत गए जायेंगे - डॉ. कुमार विश्वास Reviewed by Yogendra Nagre on May 13, 2017 Rating: 5

ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख - निदा फ़ाज़ली

May 10, 2017
यक़ीन चाँद पे सूरज में ए'तिबार भी रख मगर निगाह में थोड़ा सा इंतिज़ार भी रख ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को बदलते वक...
ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख - निदा फ़ाज़ली ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख  - निदा फ़ाज़ली Reviewed by Bhopali2much on May 10, 2017 Rating: 5
लग जा गले से फिर ये हंसी रात हो न हो, शायाद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो लग जा गले से फिर ये हंसी रात हो न हो, शायाद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो Reviewed by Bhopali2much on May 02, 2017 Rating: 5

दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है, चले आओ जहाँ तक रौशनी मालूम होती है - नुशुर वाहिदी

April 29, 2017
नई दुनिया मुजस्सम दिलकशी मालूम होती है मगर इस हुस्न में दिल की कमी मालूम होती है हिजाबों में नसीम-ए-ज़िंदगी मालूम होती है किसी दामन की ह...
दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है, चले आओ जहाँ तक रौशनी मालूम होती है - नुशुर वाहिदी दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है, चले आओ जहाँ तक रौशनी मालूम होती है - नुशुर वाहिदी Reviewed by Bhopali2much on April 29, 2017 Rating: 5

Bahubali 2 : The Conclusion | Review (हिन्दी)

April 29, 2017
शब्द नहीं हैं मेरे पास, :) :) बस चार शब्द हैं :p :p अप्रत्याशित, अद्भुत, अविश्वसनीय, आकर्षक 1. अप्रत्याशित: कहानी और पटकथा, जितनी भी ...
Bahubali 2 : The Conclusion | Review (हिन्दी) Bahubali 2 : The Conclusion | Review (हिन्दी) Reviewed by Bhopali2much on April 29, 2017 Rating: 5

दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले - कैफ भोपाली

April 28, 2017
दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे वो फ़लाने से फ़...
दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले - कैफ भोपाली दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले - कैफ भोपाली Reviewed by Bhopali2much on April 28, 2017 Rating: 5

कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं, यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नहीं - अंजुम रहबर

April 25, 2017
कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नहीं वो बे-वफ़ा जो राह में टकरा गया कहीं कह दूँगी मैं भी साफ़ कि पहचान...
कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं, यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नहीं - अंजुम रहबर कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं, यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नहीं - अंजुम रहबर Reviewed by Bhopali2much on April 25, 2017 Rating: 5
एक सुन्दर कविता - "माँ" एक सुन्दर कविता - "माँ" Reviewed by Bhopali2much on April 20, 2017 Rating: 5
तुमको सूचित हो - डॉ. कुमार विश्वास तुमको सूचित हो  - डॉ. कुमार विश्वास Reviewed by Bhopali2much on April 19, 2017 Rating: 5
हार गया तन मन पुकार कर तुम्हें - डॉ. कुमार विश्वास | Bhopali2much हार गया तन मन पुकार कर तुम्हें - डॉ. कुमार विश्वास | Bhopali2much Reviewed by Bhopali2much on April 19, 2017 Rating: 5

प्रिय तुम्हारी सुधि को मेंने यूं भी अक्सर झूम लिया - देवल आशीष | Bhopali2much

April 18, 2017
प्रिय तुम्हारी सुधि को मेंने यूं भी अक्सर झूम लिया तुम पर गीत लिखा फिर उसका अक्षर अक्षर चूम लिया में क्या जानूं मन्दिर मस्जिद गिरजा य...
प्रिय तुम्हारी सुधि को मेंने यूं भी अक्सर झूम लिया - देवल आशीष | Bhopali2much  प्रिय तुम्हारी सुधि को मेंने यूं भी अक्सर झूम लिया - देवल आशीष | Bhopali2much Reviewed by Bhopali2much on April 18, 2017 Rating: 5

न वो इक़रार करता है न वो इंकार करता है,हमें फिर भी गुमाँ है वो हमीं से प्यार करता है - हसन रिज़वी

March 31, 2017
न वो इक़रार करता है न वो इंकार करता है हमें फिर भी गुमाँ है वो हमीं से प्यार करता है मैं उस के किस सितम की सुर्ख़ियाँ अख़बार में देखू...
न वो इक़रार करता है न वो इंकार करता है,हमें फिर भी गुमाँ है वो हमीं से प्यार करता है - हसन रिज़वी न वो इक़रार करता है न वो इंकार करता है,हमें फिर भी गुमाँ है वो हमीं से प्यार करता है - हसन रिज़वी Reviewed by Bhopali2much on March 31, 2017 Rating: 5

मेरे लिहाज़ को कमज़ोरियाँ समझते हैं - डॉ. कुमार विश्वास

March 30, 2017
जो बातचीत के असली हिमायती थे कभी,‬ ‪वो बातचीत को मुहँजोरियाँ समझते हैं,‬ ‪मैं जो चुप रहता हूँ तो मेरे कुछ कमजर्फ अज़ीज़,‬ ‪मेरे लिहाज़...
मेरे लिहाज़ को कमज़ोरियाँ समझते हैं - डॉ. कुमार विश्वास मेरे लिहाज़ को कमज़ोरियाँ समझते हैं - डॉ. कुमार विश्वास Reviewed by Bhopali2much on March 30, 2017 Rating: 5
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