क्या बेचकर हम तुझे खरीदें, ऐ.... ज़िन्दगी - Bhopali2much

क्या बेचकर हम तुझे खरीदें, ऐ.... ज़िन्दगी,
सब कुछ तो गिरवी पड़ा है, ज़िम्मेदारी के बाज़ार में...

kya bechkar hum tujhe khareeden, ae zindagi
sab kuch to girvi pada hai, zimmedari ke bazaar mein.
क्या बेचकर हम तुझे खरीदें, ऐ.... ज़िन्दगी - Bhopali2much क्या बेचकर हम तुझे खरीदें, ऐ.... ज़िन्दगी - Bhopali2much Reviewed by Bhopali2much on March 16, 2017 Rating: 5
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