हाले दिल सुना नहीं सकता लफ़्ज़ मानी को पा नहीं सकता इश्क़ नाज़ुक मिज़ाज है बेह…
ओ कल्प-वृक्ष की सोन-जूही, ओ अमलतास की अमर कली, धरती के आताप से जलते मन पर छायी न…
तुम बिन कितने आज अकेले, क्या हम तुमको बतलायें? अम्बर में है चाँद अकेला, तारे उसके…
हर बार तुम्हारा चेहरा, हर बार तुम्हारी आँखे हम खुद में कितना उतरे , हम खुद में क…
मै तुम्हे ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक गया रोज़ जाता रहा , रोज़ आता रहा तुम गज़…
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