तुम बिन कितने आज अकेले,क्या हम तुमको बतलायें - डॉ. कुमार विश्वास | Bhopali2much - Bhopali2Much

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Saturday, 25 February 2017

तुम बिन कितने आज अकेले,क्या हम तुमको बतलायें - डॉ. कुमार विश्वास | Bhopali2much

तुम बिन कितने आज अकेले,
क्या हम तुमको बतलायें?
अम्बर में है चाँद अकेला,
तारे उसके साथ तो हैं,
तारे भी छुप जाएँ अगर तो,
साथ अँधेरी रात तो हैं,
पर हम तो दिन रात अकेले
क्या हम तुमको बतलायें..?

जिन राहों पर हम-तुम संग थे,
वो राहें ये पूछ रही हैं
कितनी तन्हा बीत चुकी हैं,
कितनी तन्हा और रही है
दिल दो हैं,ज़ज्बात अकेले,
क्या हम तुमको बतलायें..?

वो लम्हें क्या याद हैं तुमको
जिनमें तुम-हम हमजोली थे,
महका-महका घर आँगन था
रात दिवाली, दिन होली थे,
अब हैं, सब त्यौहार अकेले,
क्या हम तुमको बतलायें..?

तुम बिन कितने आज अकेले,
क्या हम तुमको बतलायें?

- डॉ. कुमार विश्वास


Tum bin kitne aaj akele
kya hum tumko batlaayein
ambar mein hai chaand akela
taare uske saath to hain
taare bhi chhup jaayein agar to
sath andheri raat to hai
par ham to din raat akele
kya hum tumko batlaayein

Jin raahon par hum tum sang the
vo raahein ye pooch rahi hain
kitni tanha beet chuki hain
kitni tanhaa aur rahi hain
dil do hain, jajbaat akele
kya hum tumko batlaayein

Vo lamhe kya yaad hain tumko
jinme hum tum hamjoli the
mahka mahka ghar aangan tha
raat diwali din holi the
ab hain sab tyonhaar akele
kya hum tumko batlaayein

Tum bin kitne aaj akele
kya hum tumko batlaayein

- Kumar Vishwas