हर बार तुम्हारा चेहरा, हर बार तुम्हारी आँखे - डॉ. कुमार विश्वास | Bhopali2much



हर बार तुम्हारा चेहरा, हर बार तुम्हारी आँखे
हम खुद में कितना उतरे , हम खुद में कितना झांके

Har Bar tumhara chehra, har bar tumhari aankhen
Hum khud me utre, hum khud me kitna jhaanke

हर बार यही लगता हैं, अब कुछ भी याद नहीं हैं
हर बार गुमाँ होता हैं, कोई फ़रियाद नहीं हैं
हर बार उम्मीदों वालो, सुबहें आकर कहती हैं
तुमसे बहार आने में, अब कोई विवाद नहीं हैं
पर तभी फूट पड़ती हैं, आँखों के सूखे जल में
हर बार तुम्हारी कोपल,हर बार तुम्हारे साखें

Har bar yahi lagta hai, ab kuch bhi yaad nahi hai.
Har baar ghuma hota hai, koi fariyaad nahi hai
Har bar ummeedon wali, subah aakar kehti hai
Tumse baahar aane me, ab koi vivaad nahi hai
Par tabhi foot padti hai, aankhon ke sookhe jal me
Har bar tumhari kopal, har bar tumhari saakhen

हर बार हमीं ने गाया, दुनियां का दर्द कुवांरा
हर बार पिया हैं हसकर, आंसू का सागर सारा
थक कर सोये है जब जब, नीदों की हकबंदी में
हर बार छलक जाता हैं, आँखों से ख़्वाब तुम्हारा
मन पाखी ने जब चाहा, इच्छा का अम्बर छूना
हर बार उड़ने उमड़ी, हर बार कटी हैं पांखें

Har bar hami ne gaya, duniya ka dard kuwara,
Har baar piya hai hanskar, aansoo ka saagar sara.
Thak kar soye hai jab jab, neendon ki haqbandi me,
Har bar chalak jata hai, aankhon se khwaab tumhara.
man paakhi ne jab chaha, ikchaa ka ambar chuna,
Har bar udaane umadi, har bar kati hain pankhen.

हर बार तुम्हारा चेहरा, हर बार तुम्हारी आँखे
हम खुद में कितना उतरे , हम खुद में कितना झांके

Har Bar tumhara chehra, har bar tumhari aankhen
Hum khud me utre, hum khud me kitna jhaanke

- डॉ. कुमार विश्वास | Dr. Kumar Vishwas -
हर बार तुम्हारा चेहरा, हर बार तुम्हारी आँखे - डॉ. कुमार विश्वास | Bhopali2much हर बार तुम्हारा चेहरा, हर बार तुम्हारी आँखे - डॉ. कुमार विश्वास | Bhopali2much Reviewed by Bhopali2much on February 25, 2017 Rating: 5
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