अभी-अभी एक गीत रचा है तुमको जीते-जीते - डॉ. कुमार विश्वास - Bhopali2Much

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Monday, 6 March 2017

अभी-अभी एक गीत रचा है तुमको जीते-जीते - डॉ. कुमार विश्वास




अभी-अभी एक गीत रचा है तुमको जीते-जीते !!
अभी-अभी अमृत छलका है अमृत पीते पीते !!
हां अभी-अभी  हां अभी-अभी

अभी-अभी सांसो में उतरी है सांसो की माया !!
अभी-अभी होंठों ने जाना अपना और पराया !!
अभी-अभी एहसास हुआ जीवन जीवन होता है !!
खुद को शून्य बनाना ही कितना विराट होता है !!
हां अभी-अभी  हां अभी-अभी

अभी-अभी एक गीत रचा है तुमको जीते-जीते !!
अभी-अभी अमृत छलका है अमृत पीते पीते !!
                  
~ डॉ. कुमार विश्वास ~

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