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मधुयामिनी - डॉ. कुमार विश्‍वास
मांग की सिंदूर रेखा - डॉ. कुमार विश्‍वास
रस की खान - रसखान
शौक़ सारे छिन गये, दीवानगी जाती रही
क़दम मिलाकर चलना होगा - अटल बिहारी वाजपेयी
जाने कौन नगर ठहरेंगे - डॉ. कुमार विश्‍वास
हम पंक्षी उन्मुक्त गगन के - शिवमंगल सिंह 'सुमन'
रीत भले है अलग हमारी पर पूजन तो पूजन है - देवल आशीष
कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए - दुष्यंत कुमार
अम्मा - अलोक श्रीवास्तव
ये तेरी बेरुखी की हमपे आदत खास टूटेगी  - डॉ. कुमार विश्वास
मिले हर जख्म को ,मुस्कान से सीना नहीं आया - डॉ. कुमार विश्‍वास
ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं - डॉ. कुमार विश्वास
अभी चलता हूँ रस्ते को मैं मंजिल मान लू कैसे - डॉ. कुमार विश्‍वास