क्या अजब रात थी, क्या गज़ब रात थी दंश सहते रहे, मुस्कुराते रहे देह की उर्मियाँ…
मांग की सिंदूर रेखा, तुमसे ये पूछेगी कल, यूँ मुझे सर पर सजाने का तुम्हे अधिकार क्य…
रसखान का जन्म सन् १५३३ से १५५८ के बीच दिल्ली के समीप पिहानी में हुआ था। कुछ और लोगों…
शौक़ सारे छिन गये, दीवानगी जाती रही आयीं ज़िम्मेदारियाँ, तो आशिकी जाती रही मां…
उजियारे में, अंधकार में, कल कहार में, बीच धार में, घोर घृणा में, पूत प्यार में, …
कुछ छोटे सपनों की ख़ातिर बड़ी नींद का सौदा करने निकल पड़े हैं पाँव अभागे …
हम पंक्षी उन्मुक्त गगन के पिंजरबद्ध न गा पाऐंगे कनक तीलियों से टकराकर पुलकित पंख टूट ज…
रीत भले है अलग हमारी पर पूजन तो पूजन है भाव सुमन है गीत भजन है स्वर क्या है अभ…
कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए कहीं पे शाम सिरहाने लगा के बैठ गए जले जो रेत में तल…
चिंतन दर्शन जीवन सर्जन रूह नज़र पर छाई अम्मा सारे घर का शोर शराबा सूनापन तनहाई अम्मा …
ये तेरी बेरुखी की हमपे आदत खास टूटेगी कोई दरिया न ये समझे की मेरी प्यास टूटेगी तेरे वा…
मिले हर जख्म को ,मुस्कान से सीना नहीं आया अमरता चाहते थे पर, जहर पीना नहीं आया तुम्हार…
ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं जिन्हें कोई नहीं समझा उन्हें बस हम समझते हैं कश…
अ भी चलता हूँ रस्ते को मैं मंजिल मान लू कैसे मसीहा दिल को अपनी जिद का कातिल मन लूँ कैस…
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