ये झीलों का शहर है, पहाड़ों का शहर है इसके अमन में न कोई बो सका ज़हर है यहां…
शौक़ सारे छिन गये, दीवानगी जाती रही आयीं ज़िम्मेदारियाँ, तो आशिकी जाती रही मां…
शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है दफ़्न कर दो हमें कि साँस…
एक ही मुश्दा सुभो लाती है ज़हन में धूप फैल जाती है सोचता हूँ के तेरी याद आखिर अब किसे …
चिंतन दर्शन जीवन सर्जन रूह नज़र पर छाई अम्मा सारे घर का शोर शराबा सूनापन तनहाई अम्मा …
ये तेरी बेरुखी की हमपे आदत खास टूटेगी कोई दरिया न ये समझे की मेरी प्यास टूटेगी तेरे वा…
मिले हर जख्म को ,मुस्कान से सीना नहीं आया अमरता चाहते थे पर, जहर पीना नहीं आया तुम्हार…
ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं जिन्हें कोई नहीं समझा उन्हें बस हम समझते हैं कश…
अ भी चलता हूँ रस्ते को मैं मंजिल मान लू कैसे मसीहा दिल को अपनी जिद का कातिल मन लूँ कैस…
हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते जिस की आ…
उसके पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं मै उसी तरह तो बहलता हूँ और सब जि…
हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गई शौक़ में कुछ नहीं गया शौक़ की ज़िंदगी गई एक ही हादस…
लौ-ए-दिल जला दूँ क्या कहकशाँ लुटा दू क्या है सवाल इतना ही इनका जो भी मुद्दा है मैं उसे…
कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे | जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भात…
उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या ? दाग ही देंगे मुझको दान में क्या ? मेरी हर बात बेअसर ह…
अब जुनूँ कब किसी के बस में है उसकी ख़ुशबू नफ़स-नफ़स में है हाल उस सैद का सुनाईए क्या ज…
तेरी हरबात मोहब्ब्त में गंवारा करके दिल के बाजार में बैठे खसारा करके मुन्तजिर हूं कि स…
इश्क में जीतके आने के लिये काफी हूं में निहत्था ही जमाने के लिये काफी हू मेरी हकीकत को…
सियासत में जरूरी है रवादारी समझता है वो रोजा तो नहीं रखता पर इफतारी समझता है।…
नई हवाओं की सौहवत विगाड़ देती है कबूतरों को खुली छत बिगाड़ देती है जो जुर्म…
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