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मुसाफिर हो तुम भी मुसाफिर हैं हम भीकिसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
Dr. Kumar Vishwas Latest Kavita/Muktak
वो नज़ारे जो कभी शौक ए तमन्ना थे मुझे - डॉ. कुमार विश्वास
मैंने ख़ुद में रच लिए कुछ ख़ुशनुमा मंज़र - डॉ. कुमार विश्वास
तुझे सोचने में ये दिन गया, तुझे माँगने में ये शब गयी - डॉ. कुमार विश्वास
धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती - डॉ. कुमार विश्वास
वक्‍त के क्रूर छल का भरोसा नहीं |  भोपाली 2 मच
70 Best four liner Love shayaries of all time | Bhopali2much
तुम्हें खबरों में रखते हैं मगर तुमको खबर तो हो | डा कुमार विश्वास
आप की दुनिया के बेरंग अंधेरों के लिए | डॉ. कुमार विश्वास
ताउम्र जन्नत में रहकर भी, उसे उजाड़ने में गुज़ार दी
तेरी ख़ुशरंग उदासी में जो सन्नाटा है | कुमार विश्वास
कोई कब तक फ़क़त सोचे | डॉ. कुमार विश्वास
लाख भीगे ज़मीन का आँचल | कुमार विश्वास
बस दुआए दो मुझे | भोपाली
हो कर मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिये | भोपाली
उसने सौपा नहीं मुझको मेरे हिस्से का वजूद
ज़िन्दगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाये!
Dr. Kumar Vishwas | Collection | 2016